कोलकाता : पश्चिम बंगाल (WEST BENGAL) में एसआईआर (SIR) से जुड़े अपीलीय न्यायाधिकरणों ने अब तक केवल 6,581 मामलों का निपटारा किया है, जो मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के दौरान न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों के खिलाफ दायर लगभग 25 लाख अपीलों का करीब 0.26 प्रतिशत है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
भारतीय निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार 19 में से 12 न्यायाधिकरणों द्वारा 14 मई तक निपटाए गए मामलों में 4,043 अपीलें स्वीकार की गईं, यानी निपटाए गए करीब 61.5 प्रतिशत मामलों में नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल किए गए। वहीं 1,267 अपीलें खारिज कर दी गईं।
निपटाए गए मामलों में से शेष 1,200 से अधिक मामलों की स्थिति का विवरण आंकड़ों में तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए अपीलीय व्यवस्था स्थापित करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद 20 मार्च को इन न्यायाधिकरणों का गठन किया गया था।
कोलकाता उत्तर और कोलकाता दक्षिण में कुल 1,777 मामलों का निपटारा हुआ, जो अब तक निपटाए गए कुल मामलों का
लगभग 27 प्रतिशत है। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायाधिकरण की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश टी. एस. सिवज्ञानम कर रहे थे, जिन्होंने सात मई को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। इन दोनों जिलों में 51,000 से अधिक अपीलें अब भी लंबित हैं। मुर्शिदाबाद और मालदा, जहां एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में अपीलें और नाम हटाए जाने के मामले दर्ज किए गए थे, वहां मामलों के निपटान की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।
मुर्शिदाबाद में 6.29 लाख से अधिक दायर अपीलों में से केवल 112 का निपटारा हुआ, जबकि मालदा में 5.26 लाख से ज्यादा अपीलों के मुकाबले 185 का निपटारा किया गया। अधिकारियों के अनुसार सुनवाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की गई, हालांकि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वालों की संख्या सीमित रही।
उन्होंने बताया कि निपटाए गए मामलों की संख्या बढ़कर करीब 10,000 तक पहुंच गई है, हालांकि अद्यतन आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं।
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अपीलीय प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जारी है और हम यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि पात्र मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।”
निर्वाचन आयोग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा, “विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने और अधिक सटीकता तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किया गया।”
उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को पुनरीक्षण प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप का निर्देश देते हुए कहा था कि मतदाता सूची तैयार करने को लेकर निर्वाचन आयोग और तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार के बीच भरोसे की कमी दिखाई दे रही है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान चिह्नित मामलों की जांच के लिए करीब 700 न्यायिक अधिकारियों की सिफारिश की थी। इन अधिकारियों ने निर्वाचन आयोग की सत्यापन प्रक्रिया में पहचान संबंधी दस्तावेजों में कथित विसंगतियों के आधार पर चिह्नित 60 लाख से अधिक मतदाताओं की अपीलों की जांच की।
राज्य में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव संपन्न हुई। इनसे पूर्व सत्यापन अभियान के बाद मतदाता सूची से 27 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे।
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