कोलकाता : मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव, IAS डॉ. सौरभ गर्ग के साथ ‘विकसित भारत के विज़न के साथ सांख्यिकीय प्रणाली में बदलाव’ विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया।
डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली में सुधारों पर काम कर रही है, ताकि अधिक बारीक और ठोस डेटा मिल सके, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की अवधारणा के अनुरूप हो।
डॉ. गर्ग ने कहा कि ये सुधार बेहतर समयबद्धता, बढ़ी हुई आवृत्ति, अधिक विविधता और उपयोगकर्ता-केंद्रित डेटा प्रसार के लिए किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार तकनीक को शामिल करते हुए सेवा क्षेत्र के डेटा को प्राप्त करने पर भी काम कर रही है। सेवा क्षेत्र का डेटा अगले साल मार्च तक जारी कर दिया जाएगा। डॉ. गर्ग ने बताया कि MoSPI द्वारा किए जाने वाले सर्वेक्षणों में निजी क्षेत्र की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार, हर पांच साल में आधार वर्ष (Base Year) बदलने पर भी काम कर रही है। MoSPI हर साल दो करोड़ लोगों का घरेलू सर्वेक्षण करता है। मंत्रालय ठोस डेटा प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों के साथ भी मिलकर काम कर रहा है, और उद्योग जगत MoSPI द्वारा तैयार किए गए इस डेटा का उपयोग कर सकता है।
उन्होंने समझाया कि श्रम बाजारों पर आधारित सर्वेक्षण डेटा इस बात का अंदाज़ा देता है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह की मज़दूरी प्रचलित है। अब इस डेटा को और अधिक बारीक जानकारी प्राप्त करने के लिए मासिक आधार पर जारी किया जा रहा है।
सरकार डेटा को ज़िला स्तर तक लाने का भी प्रयास कर रही है। मंत्रालय घरेलू उपभोग और व्यय सर्वेक्षण भी करता है। देश में औद्योगीकरण के समग्र स्तर का पता लगाने के लिए उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। मंत्रालय द्वारा असंगठित क्षेत्र का वार्षिक सर्वेक्षण भी किया जा रहा है।
मंत्रालय इस बात का सर्वेक्षण भी जारी कर रहा है कि बड़े उद्योग कितना पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) करने वाले हैं। मंत्रालय मुद्रास्फीति (Inflation) और IIP (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) से संबंधित डेटा भी जारी कर रहा है।
डॉ. गर्ग ने कहा कि समग्र स्तर पर डेटा के वैकल्पिक स्रोतों के रूप में मोबाइल और ई-कॉमर्स से प्राप्त डेटा की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है। देश भर में लगभग 8000 फील्ड कर्मचारी कार्यरत हैं।
MCCI में बैंकिंग और वित्त परिषद के चेयरमैन, समरजीत मित्रा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि देश 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से डेटा सामंजस्य के माध्यम से महत्वपूर्ण सांख्यिकीय सुधारों से गुज़र रहा है। GDP, CPI और IIP के लिए आधार वर्षों को अपडेट करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। देश अपना पहला राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण भी शुरू कर रहा है। ये चल रहे सुधार भारत की सांख्यिकीय प्रणालियों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने और बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के प्रति प्रतिक्रियाशीलता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
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