कोलकाता : कोलकाता के अपोलो (Apollo) मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स ने ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ‘प्रिसिजन पार्शियल नी रिकंस्ट्रक्शन’ (सटीक आंशिक घुटना पुनर्निर्माण) सर्जरी की शुरुआत की है। इस आधुनिक और मरीज-अनुकूल तकनीक का उद्देश्य पूरे घुटने को बदलने के बजाय उसके खराब हो चुके हिस्से को सुरक्षित रखना है, जो कि पारंपरिक टोटल नी रिप्लेसमेंट (पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण) का एक बेहद प्रभावी विकल्प है। अस्पताल के सीनियर कंसलटेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रंजन कामिल्या और कंसलटेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सौमेन कार ने एक मेडिकल ब्रीफिंग में बताया कि कैसे इस सटीक तकनीक की मदद से केवल घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से को ही बदला जाता है, जिससे स्वस्थ हड्डियां, आस-पास के टिश्यूज़ (ऊतक) और प्राकृतिक लिगामेंट्स पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।
वैश्विक अध्ययनों के आंकड़े बताते हैं कि इस आंशिक घुटना पुनर्निर्माण (UKR) के परिणाम बेहद शानदार और सुरक्षित हैं। ऑक्सफोर्ड के अध्ययनों के अनुसार, इस सर्जरी के बाद प्रत्यारोपित हिस्सा 10 साल तक 93% और 15 साल तक 89% मामलों में पूरी तरह सुरक्षित और चालू रहता है। इसके अलावा, पारंपरिक टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) की तुलना में इस सर्जरी के बाद शुरुआती 30 दिनों में गंभीर मेडिकल जटिलताओं का खतरा 50% तक कम हो जाता है। लंबे समय में यह घुटने को बेहतर ढंग से काम करने में मदद करता है, और मरीज पारंपरिक सर्जरी के 3 से 6 महीनों के मुकाबले मात्र 4 से 6 हफ्तों में ही हल्की गतिविधियों और खेलों में वापस लौट सकते हैं।
डॉ. रंजन कामिल्या ने स्पष्ट किया कि हालांकि पारंपरिक रूप से पूरे घुटने को बदलना एक मानक इलाज माना जाता रहा है, लेकिन कई मरीजों को वास्तव में पूरे घुटने को बदलने की जरूरत नहीं होती है। इस नई तकनीक से केवल प्रभावित हिस्से का इलाज होने के कारण शरीर को कम चोट (ट्रॉमा) पहुंचती है, रिकवरी तेजी से होती है और घुटने की प्राकृतिक गतिशीलता बनी रहती है। वर्तमान लाइफस्टाइल में बदलाव, शारीरिक निष्क्रियता और जोड़ों पर अत्यधिक तनाव के कारण अब युवाओं में भी घुटनों के दर्द और जोड़ों के घिसने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, वयस्कों में घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या 22% से 39% तक है, जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में बढ़कर 44% से 50% तक हो जाती है। ऐसे युवाओं और चुनिंदा मरीजों के लिए यह तकनीक एक बेहतरीन समाधान है, जो उन्हें प्राकृतिक अहसास के साथ जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में मदद करती है।
इस कम चीरे वाली (minimally invasive) सर्जरी से न केवल ऑपरेशन के बाद का दर्द कम होता है, बल्कि अस्पताल में रुकने का समय भी घट जाता है और मरीज जल्दी ठीक होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सटीक तकनीक भविष्य में पूरे घुटने को बदलने की आवश्यकता को लंबे समय के लिए टाल सकती है या पूरी तरह से खत्म कर सकती है। अपोलो हॉस्पिटल्स, कोलकाता अत्याधुनिक सर्जिकल प्लानिंग और तकनीक के माध्यम से मरीजों को व्यक्तिगत और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल प्रदान करने में हमेशा आगे रहता है, ताकि लोगों की गतिशीलता को बहाल कर उनके जीवन स्तर को सुधारा जा सके।
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