नई दिल्ली : मलाबार ग्रुप ने वंचित बच्चों के पुनर्वास और उन्हें दोबारा औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के अपने प्रयासों के तहत अपने माइक्रो लर्निंग सेंटर्स (एमएलसी) का विस्तार नए राज्यों और क्षेत्रों में करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक कारणों से स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को बुनियादी शिक्षा सहायता और संरचित देखभाल प्रदान करना तथा उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा में पुनः शामिल करना है। यह जानकारी संस्था द्वारा जारी बयान में दी गयी है।
इस विस्तार प्रक्रिया के अंतर्गत, मलाबार ग्रुप के मुख्यालय कुट्टिक्कट्टूर, कोझिकोड में राज्य एवं जोनल समन्वयकों तथा एमएलसी का नेतृत्व कर रहे स्वयंसेवकों के लिए एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और फील्ड टीमों को एक साथ लाया गया है, ताकि माइक्रो लर्निंग सेंटर मॉडल को नए क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने और मौजूदा केंद्रों की कार्यक्षमता को और मजबूत करने के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप तैयार किया जा सके।
माइक्रो लर्निंग सेंटर्स, मलाबार ग्रुप की प्रमुख सामाजिक पहल ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ के तहत संचालित किए जाते हैं, जिसका उद्देश्य कमजोर और वंचित समुदायों में भूख और शैक्षिक अभाव से निपटना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से वंचित बच्चों, बाल श्रम में लगे या स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पौष्टिक भोजन, प्राथमिक शिक्षा, औपचारिक स्कूलों में पुनः प्रवेश के लिए सहयोग, साथ ही पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण की सहायता दी जाती है।
वर्तमान में देश के 18 राज्यों में 1,534 माइक्रो लर्निंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनके माध्यम से मुख्य रूप से शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले 64,000 से अधिक बच्चों को सहयोग मिल रहा है। यूनिसेफ के अनुमानों के अनुसार, भारत में लगभग 2 करोड़ बच्चे सड़क पर जीवन यापन करते हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत से अधिक शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। यह आंकड़ा घनी आबादी वाले शहरों में निरंतर और व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाता है।
इस विस्तार पर प्रतिक्रिया देते हुए मलाबार ग्रुप के चेयरमैन एमपी अहमद ने कहा, ,“माइक्रो लर्निंग सेंटर्स के माध्यम से हमने सड़क पर रहने वाले बच्चों की कठिन वास्तविकताओं को करीब से देखा है। इस पहल को और अधिक क्षेत्रों तक ले जाना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है, ताकि कमजोर वर्ग के बच्चों को भोजन, शिक्षा और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल सके। हमारा दृढ़ विश्वास है कि व्यवसायों को दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव पैदा करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और हम इस दिशा में अपने प्रयास लगातार मजबूत करते रहेंगे।”
स्थापना के बाद से ही मलाबार ग्रुप अपने मुनाफे का पांच प्रतिशत सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों में निवेश करता आ रहा है। ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ कार्यक्रम के तहत समूह वर्तमान में भारत, जाम्बिया और इथियोपिया में प्रतिदिन 1.15 लाख से अधिक लाभार्थियों को भोजन उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा, ग्रैंडमा होम परियोजना के माध्यम से बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं को सुरक्षित आवास और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
मलाबार ग्रुप की सीएसआर गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्र महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता हैं। अब तक समूह सामाजिक विकास कार्यक्रमों में 376 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुका है, जिससे 18 लाख से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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