कोलकाता : दक्षिण 24 परगना के सागर द्वीप में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान किए गए ‘‘अमानवीय’’ आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करेंगी। बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग ने लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करते हुए, मतदाता सूचियों से मनमाने ढंग से नाम हटाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अनौपचारिक प्लेटफॉर्म सहित अपारदर्शी डिजिटल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से जुड़े भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हुई है और कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए प्रौद्योगिकी का ‘‘हथियार’’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करते हुए, मतदाता सूचियों से मनमाने ढंग से नाम हटाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अनौपचारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एसआईआर के कारण हुए अमानवीय व्यवहार और इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के खिलाफ अदालत में कल याचिका दायर करेंगे।’’
बनर्जी ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह कानूनी लड़ाई को और आगे बढ़ाने को तैयार हैं। हालांकि, बनर्जी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि याचिका वह दायर करेंगी, राज्य सरकार द्वारा दायर की जाएगी या तृणमूल कांग्रेस द्वारा।
बनर्जी ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय में वकील के तौर पर नहीं बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर पेश होने की अनुमति मांगेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जरूरत पड़ने पर मैं उच्चतम न्यायालय जाऊंगी और जनता के लिए पैरवी करूंगी। मैं जनता की आवाज बनूंगी।’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने कानूनी शिक्षा प्राप्त की है।
एसआईआर के पीछे ‘‘तकनीकी साजिश’’ का आरोप लगाते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया कि अपारदर्शी डिजिटल प्रक्रियाओं ने उचित व्यवस्था का स्थान ले लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘अब एआई का उभार हो चुका है। तस्वीरों और आवाजों का इस्तेमाल करके झूठ फैलाया जा सकता है। एआई का इस्तेमाल करके नाम हटाए जा रहे हैं।’’
बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘एआई यह तय कर रहा है कि किसका उपनाम बदला है, किसकी शादी हुई है, कौन सी लड़की अपने ससुराल गई है। एक हत्यारे को भी अपना बचाव करने का मौका मिलता है। यहां लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी विकल्पों के माध्यम से जवाब देने का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही 54 लाख नाम हटा दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘‘व्हाट्सएप पर चलाया जा रहा है’’, और चेताया कि मतदान अधिकारों के हनन के राजनीतिक परिणाम होंगे।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर लोगों के अधिकार छीन लिए गए, तो आप भी गायब हो जाएंगे, गायब हो जाएंगे कुमार!’’
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