कोलकाता : पश्चिम बंगाल में निजी बस संचालकों के एक प्रतिनिधि निकाय ने मंगलवार को मांग की कि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान उपयोग के लिए किराये पर ली गई बसों की भुगतान दरों में तत्काल वृद्धि की जाए। उसने आरोप लगाया कि इस संबंध में निर्वाचन आयोग से बार-बार की गई अपीलों को नजरअंदाज किया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में, ‘जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट’ ने कहा कि अधिकारियों के साथ दो दौर के संवाद के बावजूद, चुनाव ड्यूटी के लिए किराये पर ली जाने वाली बसों और मिनीबसों के लिए भुगतान दरों में वृद्धि के संबंध में उन्हें अभी तक निर्णय से अवगत नहीं कराया गया है।
संगठन के सचिव तपन बनर्जी ने बताया कि चुनाव के लिए बसों/मिनीबसों के किराए के संबंध में सीईओ के कार्यालय को दो पत्र लिखे जाने के बावजूद, बस संचालकों को निर्णय के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव की तारीखें 23 और 29 अप्रैल घोषित कर दी गई हैं। केंद्रीय बल राज्य में पहुंच चुके हैं और प्रशासन ने उनकी आवाजाही के लिए बसों को अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है। लेकिन हमें अभी तक अपनी मांगों पर निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया का पता नहीं चला है।’’
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