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गोदरेज एग्रोवेट ने किसानों को सशक्त बनाने और बंगाल की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘टकाई’ नामक नया मल्टी-क्रॉप कीटनाशक लॉन्च किया

Mochan Samachaar Desk by Mochan Samachaar Desk
28/02/2026
in बंगाल
Reading Time: 1 min read
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गोदरेज एग्रोवेट ने किसानों को सशक्त बनाने और बंगाल की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘टकाई’ नामक नया मल्टी-क्रॉप कीटनाशक लॉन्च किया
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कोलकाता : भारत की अग्रणी विविधीकृत एग्री-बिजनेस कंपनियों में से एक, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड ने नया मल्टी-क्रॉप कीटनाशक टकाई लॉन्च किया है।* आईएसके जापान द्वारा विकसित साइक्लेप्रिन™ तकनीक से संचालित ताकाई, प्रमुख लेपिडोप्टेरन कीटों (इल्ली/सुंडी वर्ग के कीट) के विरुद्ध तेज़ नियंत्रण और लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करता है, जो फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं। इससे किसानों को फसल की समग्र सेहत बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कंपनी को धान, मक्का, चना और सोयाबीन के लिए लेबल अनुमोदन प्राप्त हो चुका है, जबकि पत्ता गोभी और मिर्च फसलों के लिए लेबल विस्तार की मंज़ूरी की प्रक्रिया जारी है।
पश्चिम बंगाल—जिसे व्यापक रूप से “भारत का चावल का कटोरा” कहा जाता है और जहाँ प्रतिवर्ष लगभग 15 मिलियन टन धान का उत्पादन होता है—में लेपिडोप्टेरन कीट कृषि उत्पादकता और किसानों की आय के लिए एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं। धान की फसल में येलो स्टेम बोरर (तना छेदक) और लीफ फोल्डर के प्रकोप के दौरान गंभीर परिस्थितियों में 20%–40% तक उत्पादन हानि हो सकती है। वहीं, मक्का में फॉल आर्मीवर्म 25%–30% तक नुकसान पहुँचा सकता है, जो अत्यधिक प्रकोप की स्थिति में 60%–65% तक बढ़ सकता है। सोयाबीन में स्पोडोप्टेरा लिटुरा और सेमीलूपर के कारण 20%–30% तक पैदावार घट जाती है, जबकि मिर्च और पत्ता गोभी जैसी सब्जी फसलें भी इसी प्रकार के कीट हमलों से 15%–30% तक प्रभावित होती हैं। कीट, रोग और खरपतवार आज प्रमुख उत्पादन बाधाएँ बनकर उभर रहे हैं। ऐसे में समय पर और प्रभावी फसल संरक्षण उपाय अपनाना पश्चिम बंगाल की कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

*गोदरेज एग्रोवेट के क्रॉप प्रोटेक्शन बिज़नेस के सीईओ एन.के. राजवेलु ने कहा,* “प्रभावी कीट प्रबंधन भारतीय किसानों की सफलता को निर्धारित करता है। टकाई के माध्यम से हम किसानों को ऐसा समाधान देना चाहते हैं जो तेज़ी से कीटों की खुराक लेना बंद कराए और लंबे समय तक नियंत्रण बनाए रखे। पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ धान और अन्य प्रमुख फसलें विभिन्न मौसमों में उगाई जाती हैं और कीट प्रकोप के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहती हैं, वहाँ समय पर हस्तक्षेप और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। यह दृष्टिकोण किसानों को लागत का बेहतर प्रबंधन करने और अधिक स्थिर तथा उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार सुनिश्चित करने में मदद करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “गोदरेज एग्रोवेट में हमारा प्रयास किसानों के सामने आने वाली पर्यावरणीय और बाज़ार संबंधी चुनौतियों का समाधान देने वाले फसल सुरक्षा उत्पाद उपलब्ध कराना है। टकाई का आज का लॉन्च हमारी उस रणनीति के अनुरूप है, जिसके तहत हम अपने शोध अनुभव और मज़बूत ज़मीनी नेटवर्क के माध्यम से प्रमुख फसलों के लिए उत्पाद पोर्टफोलियो को मजबूत कर रहे हैं, ताकि किसानों और उनके परिवारों को सशक्त बनाया जा सके।”

धान एक बहु-ऋतु फसल है – खरीफ, रबी और ग्रीष्म – और इसे गर्म, आर्द्र व जलभराव वाली परिस्थितियों में उगाया जाता है, जिससे पूरे वर्ष कीट आक्रमण की संभावना बनी रहती है।
प्रारंभिक अवस्था (15–30 दिन बाद, डीएटी ) में तना छेदक पौधों को नुकसान पहुँचाता है, जिसे किसान समय पर पहचान नहीं पाते। बाद में प्रजनन अवस्था (40–60 डीएटी ) में तना छेदक और लीफ फोल्डर दोनों ही फसल पर हमला करते हैं। लीफ फोल्डर पत्तियों को मोड़कर उनका ऊतक खाता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण का क्षेत्र घट जाता है और फसल की वृद्धि प्रभावित होती है।
इन्हीं चरणों में टकाई का प्रयोग 160 मिली की मात्रा में 15–30 दिन पर और फिर 40–60 डीएटी के बीच करना चाहिए।

अन्य फसलों के लिए भी टकाई की अनुशंसित खुराक केवल 160 मिली है।
आज टकाई के लॉन्च और पिछले वर्ष मक्का के लिए हर्बीसाइड अशिताका की शुरुआत के साथ, गोदरेज एग्रोवेट नवाचार और किसान-केन्द्रित उत्पाद विकास के माध्यम से अधिक उत्पादक, सक्षम और टिकाऊ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

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Tags: GODREJ AGROVETTakai
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