कोलकाता : महानगर की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था भारतीय भाषा परिषद में ‘प्रेम की परिभाषा’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ I कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद की पदाधिकारी एवं सांझी बैठक की संयोजिका विमला पोद्दार ने किया. मुख्य वक्ता लेखक समीक्षक मृत्युंजय श्रीवास्तव ने प्रेम के वैशिष्टयों व स्वरूप पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा प्रेम का संबंध उनकी समझ और साहचर्य का मामला हैI जीवन में प्रेम एकाधिक बार हो सकता है और नए नए अनुभवों से हमें जोड़ता हैI उन्होंने कहा कि प्रेम हमें मानवीय व प्रतिबद्ध बनाता हैI

संयोजक सुधा झुनझुनावाला ने अपनी रचना का पाठ कियाI मौके पर कामिनी केजरीवाल,लक्खी चौधरी,शर्मिला चौधरी,रचना सरन,उर्मिला ध्यावाला,मंजू पोद्दार ,पौलीरानी राउत,सुषमा कुमारी,सरिता छवछरिया, कंचन भगत,श्वेता गुप्ता,सत्यम पांडेय ,राज्यवर्द्धन, सेराज खान बातिश,शुभोस्वप्ना गीता दूबे,शिवम तिवारी, सुरेश शॉ, श्रद्धा उपाध्याय ने अपनी कविताओं का पाठ किया एवं प्रेम संबंधी विचारों को साझा किया. मौके पर प्रियंकर पालीवाल, अल्पना नायक, पद्माकर व्यास, सुशील कांति,संजय राय, रमाशंकर सिंह, अनिल साह, प्रो हाशमी, श्रीमंतो मुखर्जी, प्रो मंटू दास व संस्कृति कर्मी संजय जायसवाल सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहेI कार्यक्रम का सफल संचालन रेखा ड्रोलिया ने कियाI

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