कोलकाता : विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति की घोषणा की आज यानि की बुधवार को घोषणा कर दी। भाजपा ने पुराने नेताओं को साथ लेकर चलते हुए, आंतरिक गुटबाजी को नियंत्रित करते हुए अपनी राज्य समिति का गठन किया है । गत वर्ष जुलाई में समिक भट्टाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के लगभग छह महीने बाद 35 सदस्यीय समिति की घोषणा की गई।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को प्रदेश समिति से बाहर रखा गया है, जबकि केंद्रीय नेतृत्व ने हाल ही में वरिष्ठ नेताओं से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने का आग्रह करते हुए संदेश जारी किए थे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में एक यात्रा के दौरान घोष से कथित तौर पर अपनी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए कहा था, जिससे उन्हें एक औपचारिक संगठनात्मक भूमिका मिलने की उम्मीदें बढ़ गईं।
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में संभावित उम्मीदवार माने जाने वाले कई वरिष्ठ नेताओं को जानबूझकर समिति से बाहर रखा गया है ताकि चुनाव प्रचार के दौरान व्यवस्थाएं बेहतर रहें।
इस फेरबदल से सबसे ज्यादा लाभ प्राप्त करने वालों में बिष्णुपुर के सांसद सौमित्र खान हैं, जिन्हें महासचिव बनाया गया है। उनके साथ लॉकेट चटर्जी और लोकसभा सदस्य ज्योतिर्मय सिंह महतो जैसे नेताओं की भी वापसी हुई है।



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