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अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के सभागार में दरकते रिश्ते-टूटते संबंध में महिलाओं की भूमिका विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजनव

Mochan Samachaar Desk by Mochan Samachaar Desk
24/02/2026
in बंगाल
Reading Time: 1 min read
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अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के सभागार में दरकते रिश्ते-टूटते संबंध में महिलाओं की भूमिका विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजनव
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कोलकाता : अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के केंद्रीय कार्यालय सभागार, डकबैक हाउस में दरकते रिश्ते-टूटते संबंध में महिलाओं की भूमिका विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी में वर्तमान सामाजिक परिवेश में पारिवारिक मूल्यों के क्षरण, संयुक्त परिवारों के विघटन एवं बढ़ते तलाक जैसे चिंता योग्य गंभीर विषयों पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज को सार्थक दिशा देने का प्रयास कियाI

वक्ता के तौर पर रीना तुलस्यान ने कहा कि आज के समय में महिलाओं एवं युवाओं में धैर्य की कमी देखने को मिल रही हैI जिस प्रकार कच्ची मिट्टी को समय रहते आकार देकर घड़ा बनाया जाता है, उसी प्रकार बच्चों के बाल्यकाल में ही उन्हें सही एवं गलत का भेद सिखाना आवश्यक हैI उन्होंने कहा कि विवाह के उपरांत बेटियों को नए परिवेश में ढलने के लिए समय एवं स्वतंत्रता देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे वे अपने नए परिवार को समझ सकें और उसमें सहजता से समाहित हो सकेंI रश्मि टांटिया ने कहा कि टूटते रिश्तों को बचाने के लिए बच्चों को प्रारंभ से ही उत्तम शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करना अनिवार्य हैI आज की प्रमुख समस्या बच्चों का जिद्दी स्वभाव एवं कर्म क्षेत्र के कारण परिवार से दूरी हैI

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा एवं वैश्विक अवसरों के कारण युवा पीढ़ी संयुक्त परिवारों से दूर होती जा रही है, जिससे पारिवारिक संरचना प्रभावित हो रही है. ऐसे में माता-पिता का दायित्व है कि वे अपने बच्चों को संयुक्त परिवार की महत्ता एवं वृद्धावस्था में आने वाली सामाजिक एवं भावनात्मक आवश्यकताओं से अवगत कराएँI

जूम के माध्यम से जुड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने कहा कि आज समाज के प्रत्येक वर्ग में पारिवारिक संबंधों में दरार एक गंभीर समस्या बन चुकी है. उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार एवं संस्कृति से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता हैI महिलाओं की सहभागिता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वे परिवार की रीढ़ होती हैं और परिवार को जोड़ने अथवा टूटने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती हैI

विषय प्रवर्तन करते हुए सेमिनार उपसमिति के चेयरमैन डॉ संजय हरलालका ने कहा कि परिवर्तनशील समय में बच्चों, युवाओं व महिलाओं की भावनाओं एवं अपेक्षाओं को समझना आवश्यक हैI उन्होंने समाज सुधारकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की शिक्षा एवं सशक्तिकरण ने समाज को नई दिशा प्रदान की हैI वर्तमान में संयुक्त परिवारों का विघटन, बुजुर्गों के प्रति असम्मान एवं तलाक की बढ़ती घटनाओं के पीछे सहनशीलता में कमी एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग प्रमुख कारण है. समाज सुधार में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिस पर गंभीर मंथन की आवश्यकता हैI

राष्ट्रीय महामंत्री केदारनाथ गुप्ता ने संचालन करते हुए कहा कि तथाकथित आधुनिकता के इस दौर में रिश्तों में संवादहीनता, अहंकार एवं समयाभाव के कारण दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं. महिलाएँ केवल गृहस्थी तक सीमित न होकर रिश्तों को जोड़ने वाली सूत्रधार होती हैंI यदि वे धैर्य एवं संवेदनशीलता के साथ अपनी भूमिका निभाएँ, तो बिखरते परिवारों तथा तलाक को रोका जा सकता हैI इसके अलावा राजनीतिक चेतना उपसमिति के चेयरमैन डॉ सावर धनानिया, बासुदेव अग्रवाल, नंदलाल सिंघानिया, सरिता लोहिया, सुनीता हरलालका एवं सुमित्रा धनानिया ने भी अपने विचार रखेI

कार्यक्रम के अंत में सेमिनार उपसमिति के संयोजक विष्णु अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया. मौके पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ सुभाष अग्रवाल सहित अजय नांगलिया, सीतराम अग्रवाल, गोपाल प्र. झुनझुनवाला, संदीप सेक्सरिया, पियुष क्याल, सज्जन बेरीवाल, सांवरमल शर्मा, सुमन तुलस्यान, प्रदीप गुप्ता, सुरेंद्र कुमार अग्रवाल, रमेश कुमार शोभासरिया, गौतम सराफ, शशि अग्रवाल, जय शुक्ला, पीके दीवान, सुरेश कुमार शर्मा सहित जूम के माध्यम से बिहार से महेश जालान, दिल्ली से सज्जन शर्मा, महाराष्ट्र से सुदेश करवा, कर्नाटक से शिव कुमार टेकरीवाल, उर्मिला बंका, अशोक केडिया, ओम प्रकाश बिहानी, अशोक लाडिया, अंशुमन जाजोदिया, प्रमोद पाटोदिया, कमल कुमार बैद, सौरभ गुप्ता, ओम अग्रवाल एवं राजेंद्र कलानी सहित अनेक गणमान्य सदस्य संगोष्ठी में शरीक हुएI

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Tags: akhil bhaaratavarsheey maaravaadee sammelanAll India Marwari Conference
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