कोलकाता : आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने कहा कि मंत्रिपरिषद में उनका नाम शामिल न होने से उन्हें कोई परेशानी नहीं है। देबनाथ ने जोर देकर कहा कि वह विधायक के रूप में पश्चिम बंगाल की जनता की सेवा करती रहेंगी। बता दें कि देबनाथ की बेटी की अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज परिसर में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। देबनाथ ने कहा कि राजनीति में उनका प्रवेश किसी पद या सत्ता के लिए नहीं बल्कि अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग के लिए है।
देबनाथ ने कहा, ‘‘मैंने कभी मंत्री बनने की उम्मीद नहीं की थी। राजनीति मेरे दिमाग में कभी नहीं थी। मुझे अपनी बेटी के लिए न्याय मिलने का पूरा भरोसा था। भले ही मैं विधायक न होती, मुझे पता था कि मुझे न्याय मिलेगा। पार्टी ने कभी इस बारे में मुझसे संपर्क नहीं किया। सत्ता हासिल करना या मंत्रिमंडल में जगह पाना कभी मेरी प्राथमिकता नहीं रही। मैं यहां जनता के कल्याण के लिए हूं।’’
उनकी यह टिप्पणी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने के कुछ घंटों बाद आई। पनिहाटी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने वालीं देबनाथ और हिंगलगंज की विधायक रेखा पात्रा, दोनों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। पात्रा ने कहा, ‘‘मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के लिए काम करने के लिए अधिक उत्सुक हूं।’’ भाजपा विधायक स्वपन दासगुप्ता, तापस रॉय और शंकर घोष उन 35 विधायकों में शामिल थे जिन्होंने सोमवार को मंत्री पद की शपथ ली, जिससे मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 हो गई।
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