कोलकाता/हावड़ा : साहित्यिक संस्था “नीलांबर” द्वारा आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक आयोजन ने कविता, विचार और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का ऐसा वातावरण निर्मित किया, जिसने साहित्यप्रेमियों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। आयोजन के अंतर्गत “एक साँझ संवाद की” तथा “एक साँझ कविता की-11” कार्यक्रमों का सफल आयोजन क्रमशः शरत सदन, हावड़ा एवं भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रमों का उद्देश्य समकालीन हिंदी कविता, उसके बदलते सरोकारों तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के बीच कविता की भूमिका पर गंभीर विमर्श करना था। दोनों दिनों में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, युवा रचनाकारों एवं श्रोताओं की उपस्थिति रही।

पहले दिन आयोजित “एक साँझ संवाद की” कार्यक्रम में विषय था — “सरलीकरण के दौर में कविता”। संवाद में समकालीन हिंदी कविता के चर्चित युवा स्वर अनुपम सिंह, अदनान कफ़ील दरवेश, संजय राय तथा बच्चालाल ‘उन्मेष’ ने भाग लिया। कवियों ने कविता की भाषा, शिल्प, सामाजिक सरोकार और वर्तमान समय की जटिलताओं पर अपने विचार व्यक्त किए। संवाद के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि कविता केवल प्रतिरोध का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य की संवेदना, आत्मसंवाद और सामाजिक जटिलताओं को सुरक्षित रखने की एक सांस्कृतिक शक्ति भी है।
कवयित्री अनुपम सिंह ने कहा कि आज का समय तात्कालिक प्रतिक्रियाओं और सरलीकरण का समय है, जबकि कविता मनुष्य के अनुभवों की बहुस्तरीयता को बचाने का कार्य करती है। वहीं अदनान कफ़ील दरवेश ने कविता को हर प्रकार के सरलीकरण का विरोध बताते हुए कहा कि कविता मनुष्य को तैयार समाधान नहीं देती, बल्कि उसे सोचने और प्रश्न करने की प्रेरणा देती है। बच्चालाल ‘उन्मेष’ ने अपनी कविताओं में जातिगत भेदभाव, सामाजिक अपमान और मानवीय गरिमा के प्रश्नों को केंद्र में रखने के कारणों पर चर्चा की। वहीं संजय राय ने कविता को मनुष्य के भीतर के अदृश्य संसार को अभिव्यक्त करने वाला माध्यम बताया। श्रोताओं की सक्रिय सहभागिता और प्रश्नों ने संवाद को अत्यंत जीवंत बना दिया।
दूसरे दिन आयोजित बहुप्रतीक्षित काव्य संध्या “एक साँझ कविता की-11” में समकालीन कविता की स्वर लहरियाँ देर शाम तक गूँजती रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। संस्था की ओर से श्री रितेश कुमार पांडेय ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को जीवित रखने का सबसे सशक्त माध्यम है तथा आज के समय में साहित्यिक संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
इस अवसर पर अनुपम सिंह, अदनान कफ़ील दरवेश, संजय राय तथा बच्चा लाल ‘उन्मेष’ ने अपनी प्रभावशाली कविताओं का पाठ किया। कवियों ने समकालीन समाज, मानवीय संवेदनाओं, बदलते सामाजिक परिवेश तथा आम जनजीवन से जुड़े विविध विषयों पर रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में कविता के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। अहाना ठाकुर्ता ने काव्य-नृत्य की प्रस्तुति दी, वहीं लोकरंगी के कलाकारों अपराजिता विनय, निखिल विनय, अमित चौधरी, अमित मिश्रा, राकेश चौधरी व दीपक ठाकुर ने काव्य-संगीत के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया।
दोनों कार्यक्रमों का संचालन क्रमशः प्रियंका सिंह एवं प्रीति पांडेय ने प्रभावशाली ढंग से किया। अंत में निखिल विनय ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी कवियों, अतिथियों, श्रोताओं एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
साहित्य, संवाद और संवेदना से परिपूर्ण यह दो दिवसीय आयोजन उपस्थित श्रोताओं के लिए एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बन गया तथा यह विश्वास और भी प्रबल हुआ कि कविता आज भी समाज की मानवीय चेतना को जीवित रखने की सबसे सशक्त विधा है।
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