कोलकाता : पश्चिम बंगाल में न्यायिक फैसले के बाद विचाराधीन 27 लाख मतदाताओं को सूची में जगह नहीं दी गई है और नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी बंद कर दी गई है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दो नाम जोड़े गए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने काम रोक दिया गया है। हालांकि, नाम हटाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए प्रस्तावित 19 न्यायाधिकरण ने अब भी कार्य करना शुरू नहीं किया है।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार तक न्यायाधिकरणों के समक्ष सुनवाई के लिए दो लाख से अधिक आवेदन ऑनलाइन दाखिल किए जा चुके थे। हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।
मतदाता सूची में जिन दो व्यक्तियों के नाम वापस जोड़े गए हैं, उनमें फरक्का से कांग्रेस उम्मीदवार महताब शेख और पूर्व विधायक मोत्तकिन आलम शामिल हैं, जिन्होंने नाम दोबारा सूची में दर्ज होने के बाद मानिकचक से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
कोलकाता के पास केंद्र सरकार के कार्यालय परिसरों में स्थापित होने वाले न्यायाधिकरणों के कामकाज को लेकर कोई स्पष्टता न होने के कारण, चिंतित मतदाता दस्तावेजों के साथ आगे की कार्रवाई के लिए पूरे राज्य में प्रखंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के कार्यालयों के बाहर कतार में खड़े दिखे।
जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर खड़े एक मतदाता ने कहा, ‘‘ हमने कई बार दस्तावेज जमा कराए हैं, लेकिन इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि ऑनलाइन आवेदन करना पर्याप्त होगा या नहीं।’’ एक अन्य आवेदक ने कहा,‘‘मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं और सुनवाई शुरू नहीं हुई है, इसलिए लोग चिंतित हैं।’’
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान में एक न्यायाधिकरण स्थापित करने का प्रस्ताव है और वहां तैयारियां चल रही हैं, लेकिन अभी तक कामकाज शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘काम प्रगति पर है, लेकिन न्यायाधिकरण अभी तक कार्यरत नहीं है। इसमें एक-दो दिन और लग सकते हैं।’’
समन्वय सुनिश्चित करने की पहल के तहत सात अप्रैल को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया, ताकि वह निर्वाचन आयोग, कलकत्ता उच्च न्यायालय और न्यायाधिकरणों के बीच समन्वयक का कार्य कर सके।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों 23 और 29 अप्रैल को मतदान होंगे। आयोग ने 23 अप्रैल के चुनाव के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया छह अप्रैल को बंद कर दी जबकि 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए भी यह प्रक्रिया बृहस्पतिवार को रोक दी गई।
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