कोलकाता/नयी दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि एजेंसी धनशोधन जांच के तहत कोलकाता की एक रियल एस्टेट कंपनी और पश्चिम बंगाल सरकार के कुछ नेताओं और अधिकारियों के बीच कथित वित्तीय संबंधों की जांच कर रही है।
उन्होंने कहा कि बुधवार को कोलकाता में मर्लिन ग्रुप (मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड) तथा उसके प्रवर्तक सुशील मोहता और साकेत मोहता से जुड़े सात परिसरों में छापेमारी के बाद जांचकर्ताओं ने कुछ ‘‘आपत्तिजनक’’ डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किये।
कंपनी ने कहा कि वह संघीय जांच एजेंसी के साथ सहयोग कर रही है और उसके सभी लेन-देन पारदर्शी हैं। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘मर्लिन ग्रुप कोलकाता में मर्लिन नियासा परियोजना के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही जांच को स्वीकार करता है।’’ कंपनी ने कहा, ‘‘कंपनी लागू कानूनों के अनुपालन में सभी कार्यों को जारी रखते हुए अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।’’
ईडी के अधिकारियों ने कहा कि वे कंपनी के कुछ नेताओं और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ कथित वित्तीय संबंधों की जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले हुई है, जिसके लिए दो चरणों में मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को निर्धारित है।
प्रवर्तक और कंपनी संघीय जांच एजेंसी की निगरानी में हैं और उन पर ‘‘जाली’’ दस्तावेजों का इस्तेमाल करके ‘‘झूठा’’ स्वामित्व रिकॉर्ड बनाने का आरोप है, जिसके कारण भूमि हड़पने के आरोप लगे हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने कथित तौर पर हथियाई गई जमीन का व्यावसायिक रूप से ‘‘इस्तेमाल’’ करते हुए ‘‘बड़े पैमाने पर’’ रियल एस्टेट परियोजनाएं शुरू कीं। एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने ‘‘जाली’’ दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए खुद को वैध मालिक बताकर जनता को अपनी रियल एस्टेट परियोजनाओं में बड़ी रकम निवेश करने के लिए फुसलाया।
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