कोलकाता : पश्चिम बंगाल में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब थे, उनकी अपील सुनने के लिए अधिकरणों में सुनवाई शुरू करने को लेकर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, “उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि जिनके नाम हटा दिए गए हैं, उनके पास अधिकरण से संपर्क करने का विकल्प होगा। हालांकि, ये अधिकरण कब और कहां काम करना शुरू करेंगे, इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अधिकरण स्थापित करने के लिए कुछ स्थानों का प्रस्ताव दिया है, जबकि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संभावित स्थल के रूप में न्यू टाउन में न्यायिक अकादमी का सुझाव दिया है।
अग्रवाल ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल सरकार ने अधिकरणों के लिए हर जिले में स्थान की पहचान की है। अब, उच्च न्यायालय निर्णय लेगा।’ उन्होंने कहा, ‘उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, कार्यालय परिसर को सौंपना राज्य सरकार पर निर्भर करेगा। एक बार ये प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, तो अधिकरण मतदाताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए काम करना शुरू कर देंगे।’
अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक बैठक में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि न्यायिक फैसलों को चुनौती देने के लिए मतदाताओं के वास्ते आवश्यक सॉफ्टवेयर तैयार है और ‘बहुत जल्द, इस सप्ताह या अगले सप्ताह की शुरुआत में यह परिचालन की स्थिति में होगा।’ विलोपन और समावेशन का संकेत देने वाली बूथ-वार सूचियां उपलब्ध नहीं होने पर, एक उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदाता निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपनी स्थिति व्यक्तिगत रूप से सत्यापित कर सकते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान चिह्नित किए गए नामों को आगे की जांच के लिए ‘निर्णयाधीन’ श्रेणी में रखा गया है। आयोग ने शुक्रवार रात को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की एसआईआर के तहत दूसरी अनुपूरक सूची प्रकाशित की। हालांकि, आयोग ने सूची में हटाए गए या शामिल किए गए कुल लोगों की संख्या के बारे में विवरण नहीं दिया।
आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ‘दूसरी सूची प्रकाशित हो चुकी है। हम इससे अधिक कुछ नहीं बता सकते।’ निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर रात करीब 11.30 बजे बूथ-वार सूचियां उपलब्ध करा दी गईं, लेकिन हटाए जाने या शामिल किए जाने संबंधी डेटा वाले वेब पेज तक ‘तकनीकी खामियों’ के कारण पहुंचा नहीं जा सका।
आयोग ने सोमवार को ऐसे मतदाताओं की पहली अनुपूरक सूची जारी की थी जिनका मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है, लेकिन उस सूची में हटाए गए मामलों की संख्या या निपटाए गए मामलों की सटीक संख्या पर चुप्पी साधे रखी, जिसे लेकर आलोचनाएं हुईं। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा तथा मतगणना चार मई को होगी।
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