कोलकाता : पश्चिम बंगाल के कई राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव एक या दो चरणों में कराये जाएं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने कानून-व्यवस्था में किसी भी चूक पर कड़ी कार्रवाई किये जाने की चेतावनी दी और कहा कि चुनाव संबंधी हिंसा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनाव के चरणों पर यह सुझाव कोलकाता में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के दौरान दिया गया। यह बैठक आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के तहत आयोजित की गई थी। राज्य में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल पीपुल्स पार्टी और फॉरवर्ड ब्लॉक समेत अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।


निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्य में चुनाव कराये जाने से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। कई पार्टियों ने सुझाव दिया कि चुनाव एक या दो चरणों में कराये जाएं और आश्वासन दिया कि वे इसको लेकर पूरा सहयोग करेंगे कि चुनाव शांतिपूर्ण रहें।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘दलों ने मजबूत सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की पर्याप्त संख्या में तैनाती शामिल है, ताकि हिंसा को रोका जा सके और मतदाता निर्भय होकर अपना वोट डाल सकें।’’
कुछ पार्टियों ने देसी बम, अवैध हथियारों के इस्तेमाल और चुनावों में पैसा व दबंगई के प्रभाव को लेकर भी चिंता जतायी। राजनीतिक दलों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर ज्ञानेश कुमार ने आश्वासन दिया कि भारत में चुनाव कानून के अनुसार आयोजित किए जाते हैं और राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग मतदाताओं या चुनाव कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा और डराने-धमकाने के मामलों में बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति रखता है। हम निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’’
ज्ञानेश कुमार ने यह भी दोहराया कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पारदर्शी तरीके से किया गया है और कहा कि फॉर्म 6, 7 और 8 के माध्यम से अभी भी नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।
आयोग ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य करें और सभी प्रलोभन-संबंधी गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई करें।
समीक्षा बैठक में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने चेतावनी दी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी और चूक की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने राज्य पुलिस से यह स्पष्टीकरण मांगा कि पश्चिम बंगाल में अन्य राज्यों की तरह मादक पदार्थ संबंधी सलाहकार समिति क्यों नहीं है।
अधिकारियों ने बताया कि जब महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) विनीत गोयल ने जवाब देने का प्रयास किया, तो उन्हें तत्काल सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
अधिकारियों ने बताया कि आबकारी विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि चुनाव से पहले मादक पदार्थ का उत्पादन और वितरण ना बढ़े। उन्होंने बताया कि प्राधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध शराब उत्पादन को रोकने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया।
निर्वाचन आयोग ने आरबीआई को निर्देश दिया कि वह सभी जिलों में वित्तीय लेनदेन पर कड़ी निगरानी रखे, ताकि चुनाव अवधि के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए काले धन का इस्तेमाल ना हो सके।
निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने कहा, ‘आरबीआई को सभी जिलों में कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा गया है ताकि चुनाव अवधि के दौरान बेहिसाब नकदी का कोई भी लेन-देन न हो सके।’
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