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फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट के सर्जनों ने 1,500 किमी दूर रहकर टेलीरोबोट‍िक-सर्जरी के माध्‍यम से की सफल सर्जरी

फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट ने रोबोट-सहायता प्राप्त टेली-सर्जरी की – जटिल यूरोलॉजिकल स्थितियों वाले 3 मरीजों का क‍ि या सफल उपचार, सर्जरी कोलकाता में रोबोटिक तकनीक से की गई, जबकि ऑपरेटिंग सर्जन लगभग 1,500 किमी दूर थे

Mochan Samachaar Desk by Mochan Samachaar Desk
07/03/2026
in बंगाल
Reading Time: 1 min read
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फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट के सर्जनों ने 1,500 किमी दूर रहकर टेलीरोबोट‍िक-सर्जरी के माध्‍यम से की सफल सर्जरी
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कोलकाता : फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट, कोलकाता ने उन्नत रोबोटिक और रिमोट सर्जिकल देखभाल के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने पूर्वी भारत की पहली रोबोट-सहायता प्राप्त टेली-सर्जरी सफलतापूर्वक कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। ये प्रक्रियाएं अत्याधुनिक SSI Mantra 3 रोबोट-सहायता प्राप्त सर्जिकल सिस्टम और हाई-स्पीड समर्पित 5G इंटरनेट कनेक्शन के माध्यम से की गईं, जबकि ऑपरेटिंग सर्जन लगभग 1,500 किमी दूर मौजूद थे। यह जानकारी संस्‍था द्वारा जारी बयान में दी गयी है।

ये सर्जरी तीन स्थानों — कोलकाता और फरीदाबाद — के बीच संचालित की गईं और टेली-सर्जरी के माध्यम से रोबोटिक तरीके से की गईं, जिनमें डॉक्टर नई दिल्ली और कोलकाता से ऑपरेट कर रहे थे।

इन प्रक्रियाओं का नेतृत्व डॉ. आर. के. गोपाला कृष्णा, निदेशक – यूरोलॉजी एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी, और डॉ. श्रीनिवास नारायण, निदेशक – यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट, कोलकाता ने किया। इन तीन जटिल सर्जरी ने भारत में रोबोटिक तकनीक की सटीकता और टेली-सर्जिकल सिस्टम की चिकित्सीय विश्वसनीयता को प्रदर्शित किया। इस उपलब्धि ने देश के डिजिटल हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मजबूती को भी उजागर किया और भौगोलिक बाधाओं के बावजूद विशेषज्ञ सर्जिकल सेवाएं प्रदान करने की नई संभावनाओं को खोल दिया।

पहला मामला कोलकाता की एक मध्यम आयु की महिला का था, जिसे प्रमुख रक्त वाहिकाओं और महत्वपूर्ण अंगों के पास स्थित एक बड़ा एड्रिनल ट्यूमर था। इस ट्यूमर को रिमोट रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से अत्यंत सटीकता के साथ हटाया गया।

दूसरी प्रक्रिया एक युवा महिला पर की गई, जिसे पेल्वियूरेटेरिक जंक्शन (PUJ) ऑब्स्ट्रक्शन का निदान हुआ था, जो एक जन्मजात अवरोध है और किडनी से मूत्र के निकास को प्रभावित करता है। मेडिकल टीम ने एक उन्नत पुनर्निर्माण प्रक्रिया — पायलोप्लास्टी — की, जिसमें अत्यंत सूक्ष्म टांके और उच्च सटीकता की आवश्यकता होती है, भले ही सर्जरी लंबी दूरी से की जा रही थी।

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इन दोनों मामलों में मरीज कोलकाता में थे, जबकि डॉक्टर दिल्ली में स्थित थे। मरीज पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे थे, और उनकी स्थिति बिगड़ने के कारण इलाज के लिए दिल्ली की लंबी यात्रा करना चिकित्सकीय रूप से उचित नहीं था, क्योंकि इससे उनकी स्थिति और खराब हो सकती थी।

तीसरे मामले में फरीदाबाद के 70 वर्षीय एक व्यक्ति को 9 सेमी का कैंसरग्रस्त किडनी ट्यूमर पाया गया और वे यात्रा करने में असमर्थ थे। वर्चुअल मूल्यांकन के बाद उनकी टेली-रोबोटिक पार्टियल नेफ्रेक्टॉमी की गई। इस प्रक्रिया में शेष किडनी को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को हटाया गया।

किडनी को स्थायी नुकसान से बचाने के लिए 30 मिनट की क्लैम्प विंडो के भीतर सर्जिकल टीम ने ट्यूमर हटाने और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया केवल 22 मिनट में पूरी कर ली। मरीज को रक्त चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, उन्हें सफलतापूर्वक एक्सट्यूबेट किया गया और वे अच्छी तरह से रिकवर कर रहे हैं। उम्मीद है कि उन्हें 2–3 दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। यह भारत में इस आकार के ट्यूमर के लिए की गई शुरुआती अत्यधिक जटिल टेली-रोबोटिक पार्टियल नेफ्रेक्टॉमी में से एक है।

तीनों सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुईं और ऑपरेशन के बाद मरीजों की रिकवरी भी सुचारू रही। मरीजों को न्यूनतम इनवेसिव रोबोटिक सर्जरी के लाभ मिले, जिनमें कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव, तेज़ रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक रहना शामिल है। यह उपलब्धि आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में एक परिवर्तनकारी कदम है और पूर्वी भारत में इस स्तर की पहली सफल टेली-सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रतीक है।

मामलों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. आर. के. गोपाला कृष्णा, निदेशक – यूरोलॉजी एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट, कोलकाता ने कहा,
“टेली-सर्जरी सर्जनों को रोबोट-सहायता प्राप्त सिस्टम, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और रियल-टाइम 3D इमेजिंग की मदद से दूर से ऑपरेशन करने की अनुमति देती है। इससे भौगोलिक बाधाएं दूर होती हैं, मरीजों की यात्रा की आवश्यकता कम होती है, संक्रमण का जोखिम घटता है, सर्जरी की सटीकता बढ़ती है और मरीज तेजी से स्वस्थ होते हैं। यह तकनीक विशेषज्ञ सर्जनों की कमी को भी दूर करने में मदद करती है और समय पर उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल देखभाल सुनिश्चित करती है, साथ ही वित्तीय और यात्रा से जुड़े जोखिमों को कम करती है।”

डॉ. श्रीनिवास नारायण, निदेशक, यूरोलॉजी एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट, कोलकाता ने कहा,
“रोबोटिक टेली-सर्जरी अब भविष्य की अवधारणा नहीं रही, बल्कि यह चिकित्सकीय रूप से विश्वसनीय और मरीजों के लिए सुरक्षित वास्तविकता बन चुकी है। लगभग 1,500 किलोमीटर दूर से जटिल सर्जरी करना उन्नत तकनीक, सटीकता, समन्वय और ऑन-साइट तथा रिमोट टीमों के बीच भरोसे की मांग करता है। इन सर्जरी की सफलता यह साबित करती है कि अब विश्व-स्तरीय सर्जिकल देखभाल के लिए दूरी कोई बाधा नहीं है।”

 ऋचा एस देबगुप्ता, एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, चीफ ऑफ स्ट्रैटेजी, ग्रुप हेड ESG, बिजनेस हेड जयपुर एवं कोलकाता, फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा,
“पूर्वी भारत की पहली रोबोटिक टेली-सर्जरी इस क्षेत्र के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्नत रोबोटिक सिस्टम और अत्यधिक कुशल क्लिनिकल टीमों के संयोजन से हम अधिक सुरक्षित, अधिक सटीक और सुलभ सर्जिकल देखभाल सुनिश्चित कर रहे हैं। यह उपलब्धि लंबी दूरी की यात्रा के बोझ के बिना उन्नत और सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के हमारे विज़न को मजबूत करती है।”

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Tags: Fortis Hospital and Kidney Institutetelerobotic surgery
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