कोलकाता : पश्चिम बंगाल पुलिस अब तक एकत्र किए गए महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज सामूहिक बलात्कार मामले के मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा के खिलाफ आरोप तय करने की तैयारी कर रही है। मामले में मजबूत सबूत के तौर पर डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए साइबर विशेषज्ञ बिभास चटर्जी को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि कॉलेज के अंदर हुई इस घटना में शामिल आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए जांचकर्ता मोबाइल फोन लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज समेत कई डिजिटल रिकॉर्ड जुटा रहे हैं।
कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार के सूत्रों ने पुष्टि की है कि घटना की रात मिश्रा और पीड़िता दोनों कॉलेज में मौजूद थे। मोबाइल टावर डेटा के जरिए उनकी लोकेशन की पुष्टि की गई। पुलिस ने टावर डंपिंग तकनीक नामक एक विधि का इस्तेमाल किया, जो घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए एक खास समय के दौरान एक खास क्षेत्र में की गई और प्राप्त सभी कॉल का रिकॉर्ड एकत्र करती है। कॉलेज से सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर ली गई है।
इसके अलावा पुलिस ने मिश्रा का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उससे कई अहम सुराग बरामद किए हैं, जो मामले को सुलझाने में और मदद कर सकते हैं। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि गूगल लोकेटर जैसे मोबाइल एप्लीकेशन किसी व्यक्ति के स्थान के बारे में लगभग सटीक जानकारी दे सकते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तथागत दत्ता ने कहा, “भले ही कोई व्यक्ति लोकेशन आइडेंटिफायर को बंद कर दे, फिर भी अक्षांश और देशांतर का उपयोग करके लोकेटर के मानचित्र से उसका स्थान प्राप्त करना संभव है। यह दुनिया भर में कई मामलों को सुलझाने में एक सिद्ध तकनीक है। इसलिए, इस मामले में टावर लोकेशन के अलावा इसका भी उपयोग किया जा सकता है।”
पुलिस सूत्रों ने यह भी पुष्टि की कि एक अन्य आरोपी जैब अहमद उस रात कॉलेज में मौजूद था। पास की एक दवा की दुकान के सीसीटीवी फुटेज में उसे इनहेलर खरीदते हुए दिखाया गया है और ऑनलाइन भुगतान के दृश्य भी कैद किए गए हैं। ये सभी डिजिटल दस्तावेज और साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, पीड़ित के फोन और दो अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन से एकत्र किए गए डेटा को भी अदालत में जमा किया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस को उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने के लिए सभी डिजिटल साक्ष्यों को केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) को भेजना होगा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुकदमा शुरू होने के बाद सभी दस्तावेज और साक्ष्य आधिकारिक तौर पर अदालत में पेश कर दिए जाएंगे।