• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Saturday, August 30, 2025
  • Login
Mochan Samachaar
Advertisement
  • होम
  • बंगाल
  • देश
    • असम
    • बंगाल
  • विदेश
  • व्‍यापार
  • खेल
  • धर्म
  • स्‍वास्‍थ्‍य
  • संपर्क करें
No Result
View All Result
  • होम
  • बंगाल
  • देश
    • असम
    • बंगाल
  • विदेश
  • व्‍यापार
  • खेल
  • धर्म
  • स्‍वास्‍थ्‍य
  • संपर्क करें
No Result
View All Result
Mochan Samachaar
No Result
View All Result
  • होम
  • बंगाल
  • देश
  • विदेश
  • व्‍यापार
  • खेल
  • धर्म
  • स्‍वास्‍थ्‍य
  • संपर्क करें
Home देश

किसानों को खेत से बाहर निकलकर अपनी उपज के विपणन में शामिल होना चाहिए : उपराष्ट्रपति

"चारों ओर देखिए, भारत जैसा कोई राष्ट्र नहीं है जहां इतनी समावेशिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो : उपराष्ट्रपति

Mochan Samachaar Desk by Mochan Samachaar Desk
27/04/2025
in देश
Reading Time: 5 mins read
0
किसानों को खेत से बाहर निकलकर अपनी उपज के विपणन में शामिल होना चाहिए : उपराष्ट्रपति
252
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

नयी दिल्‍ली : भारत के उपराष्ट्रपति  जगदीप धनखड़ ने आज कहा, “भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है, एक शांतिप्रिय राष्ट्र है जहां समावेशिता और अभिव्यक्ति एवं विचार की स्वतंत्रता हमारी विरासत है।”

तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (Tamilnadu Agricultural University) में “विकसित भारत के लिए कृषि शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना” विषय पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि कोई हजारों वर्षों के इतिहास को देखे तो वह पाएगा कि हमारी सभ्यता में समावेशिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता फली-फूली, विकसित हुई और उसका सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अभिव्यक्ति और समावेशिता तुलनात्मक रूप से विश्व में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा, “चारों ओर देखिए, भारत जैसा कोई राष्ट्र नहीं है जहां इतनी समावेशिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो।” उन्होंने आगे कहा कि इस महान राष्ट्र के नागरिक के रूप में- इस सबसे बड़े लोकतंत्र, सबसे पुराने लोकतंत्र, सबसे जीवंत लोकतंत्र में हमें इस बात के प्रति अत्यंत सतर्क, सावधान और जागरूक रहने की आवश्यकता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समावेशिता हमारी राष्ट्रीय संपत्ति बने।

कृषि क्षेत्र की बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि “हमें खाद्य सुरक्षा से किसानों की समृद्धि की ओर बढ़ना चाहिए।” उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध होना होगा और यह विकास तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से शुरू होना चाहिए।

उन्होंने आगे बताया कि किसानों को खेत से बाहर निकलकर अपनी उपज के विपणन में शामिल होना चाहिए। “किसानों को केवल उत्पादक बनकर इसके बारे में भूल नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि वे कड़ी मेहनत और अथक परिश्रम से उपज उगाएँगे और उसे उस समय बेचेंगे जब वह बाज़ार के लिए सही होगी, बिना उसे रखे। इससे आर्थिक रूप से बहुत ज़्यादा लाभ नहीं होता,” । उन्होंने जागरूकता उत्पन्न करके और उन्हें यह बताकर किसानों को सशक्त बनाने का आह्वान किया कि सरकारी सहकारी प्रणाली बहुत मज़बूत है।

उन्होंने कहा, “पहली बार हमारे पास सहकारिता मंत्री हैं। सहकारिता को हमारे संविधान में स्थान मिला है। इसलिए हमें किसान व्यापारियों की जरूरत है। हमें किसान उद्यमियों की जरूरत है। उस मानसिकता को बदलें ताकि किसान स्वंय को उत्पादक से मूल्य वर्धक में बदल सके और कुछ ऐसा उद्योग शुरू कर सके जो कम से कम उत्पादन पर आधारित हो।”

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि कृषि उपज का बाजार बहुत बड़ा है और जब कृषि उपज में मूल्य संवर्धन होगा तो उद्योग फलेगा-फूलेगा।

श्री धनखड़ ने कहा कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह इसे ध्यान में रखे, विशेषकर ऐसे समय में जब राष्ट्र अबाध रूप से तीव्र आर्थिक उन्नति कर रहा है, बुनियादी ढांचे में असाधारण वृद्धि हो रही है, अंतिम मील तक तकनीक पहुंच रही है तथा राष्ट्र और उसके नेता, प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय ख्याति अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है, “इसलिए, नागरिकों के रूप में, राष्ट्र के इस उत्थान को बनाए रखने में योगदान करने की हमारी बड़ी भूमिका है,”

नागरिक भागीदारी पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह हर नागरिक के लिए पूरी तरह से जागरूक होने और आशा और संभावना का लाभ उठाने का सही समय है। उन्होंने सभी से यह दृढ़ संकल्प लेने का आग्रह किया कि राष्ट्र पहले हमारा आदर्श वाक्य हो। यह राष्ट्र के प्रति हमारी अडिग प्रतिबद्धता और हमेशा मार्गदर्शक हो। उन्होंने जोर देकर कहा, “कोई भी हित राष्ट्र के हित से बड़ा नहीं हो सकता।”

कृषि में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रयोगशाला और भूमि के बीच की दूरी को केवल दूर ही नहीं करना चाहिए- यह एक निर्बाध संपर्क होना चाहिए। उन्होंने कहा, “प्रयोगशाला और भूमि एक साथ होने चाहिए और इसके लिए 730 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों को किसानों के साथ बातचीत के जीवंत केंद्र होना चाहिए ताकि किसानों को शिक्षित किया जा सके।” उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को जोड़ने का भी आह्वान किया जिसके पास कृषि विज्ञान के हर पहलू पर ध्यान केंद्रित करने वाले 150 से अधिक संस्थान हैं।

सरकार की पहल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पीएम किसान निधि सम्मान जैसी अभिनव योजनाएं मुफ्त योजनाएं नहीं हैं, बल्कि उस क्षेत्र के साथ न्याय करने का उपाय हैं जो हमारी जीवन रेखा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह किसानों के लिए सीधा हस्तांतरण है।”

इस संदर्भ में, श्री धनखड़ ने कहा, “हमारे देश में उर्वरकों के लिए भारी सब्सिडी है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को यह सोचना चाहिए कि अगर किसानों के लाभ के लिए उर्वरक क्षेत्र को वर्तमान में दी जाने वाली सब्सिडी सीधे किसानों तक पहुंचे तो हर किसान को हर साल लगभग 35,000 रुपये मिलेंगे।”

बड़े राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर उपराष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा, “तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को विकसित भारत की प्राप्ति के लिए सावधानीपूर्वक काम करना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय में होना सौभाग्य की बात बताई, उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने भारत की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

उन्होंने कहा, “भारत खाद्यान्न की कमी से खाद्यान्न की प्रचुरता की ओर बढ़ रहा है, और तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि विकास को प्रभावित किया है तथा ग्रामीण क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

उपराष्ट्रपति ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘कृषि क्षेत्र के महानतम दिग्गजों में से एक, भारत के सबसे गौरवशाली सपूतों में से एक, डॉ. एमएस स्वामीनाथन, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र थे।’ उन्होंने बताया कि डॉ. स्वामीनाथन को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सहित सभी चार नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित होने का दुर्लभ गौरव प्राप्त था।

प्रभावोन्मुख नवाचार और अनुसंधान का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि नवाचार और अनुसंधान पहलों का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि उनका किसान पर क्या प्रभाव पड़ेगा। “क्या उनका जमीनी स्तर पर प्रभाव पड़ रहा है? इसलिए, अनुसंधान अपनाया जाना चाहिए। अनुसंधान आवश्यकता के आधार पर होना चाहिए। अनुसंधान को उस उद्देश्य को पूरा करना चाहिए जिसे आप पहचानते हैं,” उन्होंने सलाह दी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को न केवल केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बल्कि उद्योग, व्यापार, व्यवसाय और वाणिज्य द्वारा भी सहयोग किया जाना चाहिए।

अपने समापन भाषण में उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारा भारत हमेशा से कृषि प्रधान देश रहा है। इसका दिल गांवों में धड़कता है। यह रोजगार और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है और हर मायने में देश का आधार है।

तमिल के प्राचीन ज्ञान को याद करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इस पवित्र भूमि में महान कवि-संत तिरुवल्लुवर ने किसान की भूमिका को उच्चतम स्थान दिया है। उनका उदाहरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “किसान मानवता की आधारशिला हैं और कृषि सबसे प्रमुख शिल्प है।” उन्होंने तिरुवल्लुवर के ज्ञान की सराहना करते हुए इसे कालातीत बताया और कहा कि “किसान हमारे अन्नदाता हैं। किसान हमारे भाग्य के निर्माता हैं।”

इस अवसर पर श्री आरएन रवि, तमिलनाडु के राज्यपाल, श्रीमती एन. कयालविझी सेल्वराज, मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री, तमिलनाडु सरकार, ⁠श्री वी. दक्षिणमूर्ति, कृषि उत्पादन आयुक्त और सरकार के सचिव, डॉ. एम. रवीन्द्रन, अनुसंधान निदेशक, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और कार्यवाहक कुलपति आर. थमिज़ वेंडन और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

Tags: Farmers must get out of their farms and get involved in marketing their produce: Vice PresidentTamilnadu Agricultural Universityतमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय
Previous Post

धरती की सेहत ठीक रखने और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए पेड़ जरूर लगाएं : पीएम मोदी

Next Post

पहलगाम हमला : केंद्र ने पाकिस्तानी नागर‍िकों की चारधाम यात्रा पर लगायी रोक

Next Post
उत्तराखंड में 10 मई से चारधाम यात्रा हो रही है शुरू,अब तक हुए 10.66 लाख पंजीकरण

पहलगाम हमला : केंद्र ने पाकिस्तानी नागर‍िकों की चारधाम यात्रा पर लगायी रोक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Mochan Samachaar

© 2023 Mochan Samachaar Design and Develop by GKB Web Solution.

Udyam Registration Number : UDYAM-WB-10-0083581

  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • होम
  • बंगाल
  • देश
    • असम
    • बंगाल
  • विदेश
  • व्‍यापार
  • खेल
  • धर्म
  • स्‍वास्‍थ्‍य
  • संपर्क करें

© 2023 Mochan Samachaar Design and Develop by GKB Web Solution.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In